| भारत प्रश्न मंच की उन्नीसवीं कड़ी में आपका हार्दिक अभिनंदन है आज का प्रश्न है- नीचे दिखाये गये चित्र में चार व्यक्ति हैं आपको इनके नाम बताने हैं हिंट- इनके गाये गीतों को कौन भुल सकता है अमिताभ बच्चन को उनका यह यह नाम किसने प्रदान किया ? है ना आसन से प्रश्न :-) और हाँ पहले प्रश्न में एक व्यक्ति का सही नाम बताने पर ७.५० अंक आप प्रश्नों के उत्तर कल रात के ८:०० बजे तक दे सकते हैं इस पहेली के परिणाम का प्रकाशन सोमवार को शाम ७:०० बजे किया जाएगा |
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शनिवार, 13 नवंबर 2010
भारत प्रश्न मंच भाग-१९
बुधवार, 10 नवंबर 2010
हर चिट्ठा कुछ कहता है
| हर चिट्ठा कुछ कहता है दर्द को खुद में समेटे हुए वक्त के दिये जख्मों को उकेरता है बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है बीते लम्हों को संजोकर सुनहरे पलों की याद लिये अपनी कहानी कहता है बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है कभी शून्य आवाज में कभी चीर आवाज में मन को झकझोर देता है बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है कभी मासूम आवाज में तुतलाती आवाज में एक बचपन कुछ कहता है कभी गंभीर आवाज में बनकर एक नव चिराग जिंदगी का सच बताता है बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है एक पहेली बनकर पहेली बनी जिंदगी को खुदब खुद सुलझाता है सुझबूझ की बाते बताकर बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है उम्र की दहलीज पे बनकर बचपन की आवाज खुद को एक मासुम बनकर देखता है इस जिंदगी के मेले में बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है अंधेरी राह पर ठोकरों को भी सहता है पर दुसरों के लिये नवदीप बनकर वह पथ पर चलता है बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है तोड़ कर बाधाएँ सीमाओं की सागर की गहराई को भी नापता है जोड़कर परायों को आपस में यह अपना नया परिवार बनाता है बनकर शब्दों की माला हर चिट्ठा कुछ कहता है............ |
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रविवार, 7 नवंबर 2010
भारत प्रश्न मंच भाग- १८ परिणाम
| भारत प्रश्न मंच भाग १८ का परिणाम दिखाया गया चित्र आई.आई.टी. रुड़की का है ![]() बोनस अंक के प्रश्न का सही जवाब है- मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल जी थे प्रथम स्थान ![]() अंक-५० दूसरा स्थान ![]() अंक-५० तृतीय स्थान अंक-५० चौथा स्थान ![]() अंक-५० पाँचवा स्थान ![]() अंक-५० छठा स्थान ![]() अंक-५० सातवाँ स्थान अंक-५० आठवां स्थान ![]() सभी विजेताओं को पुनः ढेरों शुभकामनाएँ अगली बार की पहेली फिल्म जगत से है और हर बार की पहेली से थोड़ा हटकर है. आइयेगा जरुर. और हाँ आप लोगों ने मेरी पहली लघुकथा तुम क्यों चली आती हो को पसंद किया उसके लिये आभार............कभी कभी मेरी भी कलम डगमगाते हुए, टूटे-फूटे शब्दों को पिरोने का प्रयास करती है और आप लोग उसे भी पसंद कर लेते हैं |
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शनिवार, 6 नवंबर 2010
भारत प्रश्न मंच भाग -१८
| भारत प्रश्न मंच भाग -१८ भारत प्रश्न मंच नववर्ष कि एक नयी सुबह के साथ आपका अभिनन्दन करता है आज का पहला प्रश्न है- नीचे दिखाए गए स्थान का क्या नाम है और ये कहाँ स्थित है- ![]() हिंट- ये एक प्रसिद्द शैक्षणिक संस्था है हाल ही में कुछ विवादों के कारण काफी चर्चित रहा आज का बोनस अंक के लिए प्रश्न है- मध्य प्रदेश के पहले मुख्य मंत्री कौन थे ? आप प्रश्नों के उत्तर कल शाम के ८:०० बजे तक दे सकते है |
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बुधवार, 3 नवंबर 2010
तुम क्यों चली आती हो
| तुम क्यों चली आती हो "नहीं बेटा ! मेरे पास अब पैसे नहीं हैं, चल तु हाथ धो ले , देख मैने तेरे लिये पुड़ी और खीर बनायी है......" "नहीं पहले मुझे एक रुपये दो वरना मैं कुछ नहीं खाउंगा, तुमने पिछली साल भी मुझे एक्को रुपये नहीं दी थी......." सिसकीयों की आवाजे इस झोपड़े मे फैल रही थी. "बेटा प्रकाश तु तो इस घर की हालत देख ही रहा है हमारे पास कुछ भी नहीं है, बड़े ही मुश्किल से ५० रुपये मिलें हैं उसी से इस त्योहार के लिये तैयारी की है.............अब तु ही बता कहाँ से दूँ तुझे एक रुपये.......देख तु जब बड़ा होकर कमाने लगना तब ढेर सारे पटाखे फोड़ना , चल हाथ धोकर खाना खा ले फिर मै तुझे मिठाई भी खिलाऊँगी " "मै नहीं खाऊँगा...... तुम्ही खाओ" यह कह कर वह वही पास में रखे टुटे खाट पर सो गया, जब मासुम मन रोता है तब भी उसमें एक नयी आश रहती है. वह मन में सोचता है कि जब बड़ा हो जाऊँगा तो ढेर सारे पटाखे फोड़ुंगा और उस राजु को एक भी नहीं दुंगा. मैं भी नये-नये कपड़े पहनुंगा तब देखना.... और इधर आंसुओं की इन धाराओं के बीच प्रकाश के इस त्योहार पर भी मन का प्रकाश बुझा हुआ था. तुम हर बार आती हों, कुछ खुशियाँ देने के बदले, रुलाकर चली जाती हो, तु ही तो सब कुछ है, तेरा स्वागत कैसे करूँ, आखिर तुम क्यों चली आती हो......... इस छोटे से घर के बाहर हर तरफ उजाले ही उजाले थे, ये बड़े भवन वाले किसी के स्वागत में कोई कमी नहीं रखना चाहते थे. और इस टुते फुटे घर में भला आये ही कौन................. |
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