शनिवार, 13 नवंबर 2010

भारत प्रश्न मंच भाग-१९


भारत प्रश्न मंच की उन्नीसवीं कड़ी में आपका हार्दिक अभिनंदन है


आज का प्रश्न है-
नीचे दिखाये गये चित्र में चार व्यक्ति हैं आपको इनके नाम बताने हैं

हिंट- इनके गाये गीतों को कौन भुल सकता है

आज का दुसरा प्रश्न जो कि बोनस अंक हेतु है, वह है-
अमिताभ बच्चन को उनका यह यह नाम किसने प्रदान किया ?


है ना आसन से प्रश्न :-) और हाँ पहले प्रश्न में एक व्यक्ति का सही नाम बताने पर ७.५० अंक 


आप प्रश्नों के उत्तर कल रात के ८:०० बजे तक दे सकते हैं 


इस पहेली के परिणाम का प्रकाशन सोमवार को शाम ७:०० बजे किया जाएगा 
best of luck scraps for orkut


बुधवार, 10 नवंबर 2010

हर चिट्ठा कुछ कहता है

हर चिट्ठा कुछ कहता है

कभी खामोश लफ्जों में
दर्द को खुद में समेटे हुए
वक्त के दिये जख्मों को उकेरता है
बनकर शब्दों की माला
हर चिट्ठा कुछ कहता है





बीते लम्हों को संजोकर
सुनहरे पलों की याद लिये
अपनी कहानी कहता है
बनकर शब्दों की माला
हर चिट्ठा कुछ कहता है





कभी शून्य आवाज में
कभी चीर आवाज में
मन को झकझोर देता है
बनकर शब्दों की माला
हर चिट्ठा कुछ कहता है





कभी मासूम आवाज में
तुतलाती आवाज में
एक बचपन कुछ कहता है
कभी गंभीर आवाज में
बनकर एक नव चिराग
जिंदगी का सच बताता है
बनकर शब्दों की माला
हर चिट्ठा कुछ कहता है

Peace


एक पहेली बनकर
पहेली बनी जिंदगी को
खुदब खुद सुलझाता है
सुझबूझ की बाते बताकर
बनकर शब्दों की माला
हर चिट्ठा कुछ कहता है



उम्र की दहलीज पे
बनकर बचपन की आवाज
खुद को एक मासुम बनकर देखता है
इस जिंदगी के मेले में
बनकर शब्दों की माला
हर चिट्ठा कुछ कहता है



अंधेरी राह पर
ठोकरों को भी सहता है
पर दुसरों के लिये नवदीप बनकर
वह पथ पर चलता है
बनकर शब्दों की माला
हर चिट्ठा कुछ कहता है
blue book


तोड़ कर बाधाएँ सीमाओं की
सागर की गहराई को भी नापता है
जोड़कर परायों को आपस में
यह अपना नया परिवार बनाता है
बनकर शब्दों की माला
          हर चिट्ठा कुछ कहता है............  





                                                                                                                                                                                         

रविवार, 7 नवंबर 2010

भारत प्रश्न मंच भाग- १८ परिणाम

भारत प्रश्न मंच भाग १८ का परिणाम 

दिखाया गया चित्र आई.आई.टी. रुड़की का है

बोनस अंक के प्रश्न का सही जवाब है- 
मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल जी थे

भारत प्रश्न मंच भाग - १८ की विजेता लिस्ट इस प्रकार है

प्रथम स्थान
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अंक-५०
Orkut congratulations Scraps
दूसरा स्थान
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अंक-५०
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तृतीय स्थान
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अंक-५०
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चौथा स्थान
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अंक-५०
Orkut congratulations Scraps
पाँचवा स्थान
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अंक-५०
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छठा स्थान
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अंक-५०
Orkut congratulations Scraps
सातवाँ स्थान
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अंक-५०
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आठवां स्थान
My Photo
अंक-50  
Orkut congratulations Scraps
सभी विजेताओं को पुनः ढेरों शुभकामनाएँ

अगली बार की पहेली फिल्म जगत से है और हर बार की पहेली से थोड़ा हटकर है. आइयेगा जरुर.
और हाँ आप लोगों ने मेरी पहली लघुकथा तुम क्यों चली आती हो को पसंद किया उसके लिये आभार............कभी कभी मेरी भी कलम डगमगाते हुए, टूटे-फूटे शब्दों को पिरोने का प्रयास करती है और आप लोग उसे भी पसंद कर लेते हैं

शनिवार, 6 नवंबर 2010

भारत प्रश्न मंच भाग -१८



भारत प्रश्न मंच भाग -१८
Orkut welcome Scraps
भारत प्रश्न मंच नववर्ष कि एक नयी सुबह के साथ आपका अभिनन्दन करता है

आज का पहला प्रश्न है-
नीचे दिखाए गए स्थान का क्या नाम है और ये कहाँ स्थित है-

हिंट- ये एक प्रसिद्द शैक्षणिक संस्था है हाल ही में कुछ विवादों के कारण काफी चर्चित रहा 

आज का बोनस अंक के लिए प्रश्न है-
मध्य प्रदेश के पहले मुख्य मंत्री कौन थे ?  

आप प्रश्नों के उत्तर कल शाम के ८:०० बजे तक दे सकते है                                                                                                

बुधवार, 3 नवंबर 2010

तुम क्यों चली आती हो



तुम क्यों चली आती हो

"मॉ तुम मुझे २ रुपये क्यों नही दे देती वो देखो राजु बहोत ढेर सारे पटाखे फोड़ रहा है, मुझे ललचा भी रहा है......मॉ चलो एक रुपये ही दे दो मै टिकरी ही ले लुंगा" एक मासुम आवाज जिसके चेहरे की चमक सुरज की रोशनी से कम नहीं थी लेकिन उसके चिथड़े कपड़े उसकी अलग ही कहानी कह रहे थे.
"नहीं बेटा ! मेरे पास अब पैसे नहीं हैं, चल तु हाथ धो ले , देख मैने तेरे लिये पुड़ी और खीर बनायी है......"
"नहीं पहले मुझे एक रुपये दो वरना मैं कुछ नहीं खाउंगा, तुमने पिछली साल भी मुझे एक्को रुपये नहीं दी थी......." सिसकीयों की आवाजे इस झोपड़े मे फैल रही थी.
"बेटा प्रकाश तु तो इस घर की हालत देख ही रहा है हमारे पास कुछ भी नहीं है, बड़े ही मुश्किल से ५० रुपये मिलें हैं उसी से इस त्योहार के लिये तैयारी की है.............अब तु ही बता कहाँ से दूँ तुझे एक रुपये.......देख तु जब बड़ा होकर कमाने लगना तब ढेर सारे पटाखे फोड़ना , चल हाथ धोकर खाना खा ले फिर मै तुझे मिठाई भी खिलाऊँगी  "
"मै नहीं खाऊँगा...... तुम्ही खाओ" यह कह कर वह वही पास में रखे टुटे खाट पर सो गया, जब मासुम मन रोता है तब भी उसमें एक नयी आश रहती है. वह मन में सोचता है कि जब बड़ा हो जाऊँगा तो ढेर सारे पटाखे फोड़ुंगा और उस राजु को एक भी नहीं दुंगा. मैं भी नये-नये कपड़े पहनुंगा तब देखना....
और इधर आंसुओं की इन धाराओं के बीच प्रकाश के इस त्योहार पर भी मन का प्रकाश बुझा हुआ था.
तुम हर बार आती हों,
कुछ खुशियाँ देने के बदले,
रुलाकर चली जाती हो,
तु ही तो सब कुछ है,
तेरा स्वागत कैसे करूँ,
आखिर तुम क्यों चली आती हो.........
इस छोटे से घर के बाहर हर तरफ  उजाले ही उजाले थे, ये बड़े भवन वाले किसी के स्वागत में कोई कमी नहीं रखना चाहते थे.
और इस टुते फुटे घर में भला आये ही कौन.................
Orkut Scraps